शारदीय नवरात्रि 2020, इन 11 दुर्गा मंत्रो के प्रयोग से करें नवरात्रों में तन-मन-धन-की प्राप्ति !

 

शारदीय नवरात्रि 2020, इन 11 दुर्गा मंत्रो के प्रयोग से करें

नवरात्रों में तन-मन-धन-की प्राप्ति !

 

मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का पर्व का प्रारंभ 17 अक्टूबर से हो गया है। आज शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। आज नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है। वहीं, नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री की पूजा विधिपूर्वक की जाती है। नवरात्रि में पूजा के दौरान दुर्गा चालीसा और दुर्गा आरती के अलावा दुर्गा सप्तशती का पाठ भी महत्वपूर्ण होता है। आज नवरात्रि के विशेष अवसर पर आप दुर्गा सप्तशती के कुछ मंत्रों का

जाप करेंगे, तो उससे आपको मातारानी की विशेष कृपा प्राप्त होगी।

दुर्गा सप्तशती :

नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष आशीर्वाद प्राप्ति के लिए किया जाता है। दुर्गा सप्तशती में अध्याय और 11  सिद्ध सम्पुट मंत्र दिए गए हैं। हर मनोकामना के लिए अलग मंत्र है। मां दुर्गा की पूजा के समय इन मंत्रों का जाप करके आप अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति कर सकते हैं। आइए जानते हैं उन मंत्रों के बारे में –

  1. शुभ फल प्राप्ति मंत्र :

स्थापना के दिन बगलामुखी का यंत्र लाल कपड़े पर लकड़ी के स्वच्छ पट्टे पर स्थापित कर यंत्र के दोनों ओर गेंहूँ की ढेरी लगाकर एक ओर सरसों के तेल का दीपक तथा दूसरी ओर शुद्ध घी का दीपक जलाकर लाल मूँगे की माला से निचे दिए मंत्र का 10 माला प्रतिरात्रि जप करें –

करोति सा नः शुभहेतुरीश्वरी।

शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः।

 

 

  1. रोग निवारण साधना मंत्र :

एक मोती संख एवं सात गोमती चक्र काले तिल को ढेरी पर रखकर साधना उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जायें ततपश्चात स्फटिक अथवा किसी भी माला से प्रतिदिन जप करें। नवरात्री की अंतिम तिथि तक 108 माला जप पूर्ण होना आवश्यक है।

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान संकलान भीष्टान।  

त त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्राश्रयतां प्रयान्ति।।

 

  1. व्यापार वृद्धि हेतु मंत्र :

प्रातःकाल स्नान कक्रके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूरब दिशा की ओर मुख करके सामने रखे तख़्त पर पीला वस्त्र बिछाकर थाली में केशर से “ॐ यक्षाय नमः” लिखे तत्पश्चात ‘कुबेर यंत्र’ स्थापित करके पूजन करें और पीले रंग के पुष्प अर्पित करके पूजन करें और पिले रंग के पुष्प अर्पित करके निचे दिए मंत्र का पाठ करें –

ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट लक्ष्मी मम गृहेधन पुरय नमः।

  1. विद्या वृद्धि मंत्र :

पढ़ने वाले बालक यह प्रयोग करके परीक्षा में पूर्ण सफलता प्राप्त कर सकते है –

स्थापना के समय पूर्व दिशा की ओर मुँह करके चौकी पर सफ़ेद वस्त्र बिछायें तत्पश्चात थाली में केशर से ‘ह्रीं’ लिखकर ‘सरस्वती कवच’ , स्थापित करके केशर का तिलक करें तथा स्फटिक की माला से 11 माला प्रतिदिन पाठ करें –

ॐ नमों श्री वद वाग्वादिनी बुद्धि बर्ध्दय

ॐ ह्रीं नमः स्वाहा।।”

 

  1. पितृ दोष निवारण मंत्र :

घर की शांति नष्ट हो जाने पर निम्न मंत्र का पाठ करें-शांति पूर्ववत स्थापित हो जाएगी।

ॐ श्रीं सर्वापितृ निवारणाय क्लेश दन दन

सुख शांति देहि देहि फट स्वाहा।।”

 

  1. गृह कलह मुक्ति प्रयोग मंत्र :

रुद्राक्ष की माला से नवरात्र में 108 बार मंत्र पाठ करें –

धां धीं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी।

क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं में शुभं कुरु।

उक्त काली यंत्र का विधिवत पूजन करने से गृह कलेश दूर होता है। इसमें तनिक भी संदेह नहीं है।

 

  1. संतान प्राप्ति मंत्र :

संतान होने के लिए परम कल्याणकारी यह मंत्र उस औषधि के समान है जो मृत्यु को प्राप्त हो रहे प्राणी को पुनर्जीवित कर देती है। संतान प्राप्ति हेतु ‘संतान गोपाल यंत्र’ स्थापित करके पूजन करें फिर रुद्राक्ष की माला से मंत्र जाप करें। नवरात्र स्थापना दिवस से लगातार 45 दिनों तक प्रतिदिन 108 बार मंत्र जाप करें। देवी प्रसन्न होकर पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद देकर तुम्हे धन्य करेंगी।

सदवि नित्यं परतिप्यमान, व्यामेव सीतत्यभिभाषमाः।

दृढ़व्रतौ राजसुतौं महात्मा, तवैव लाभायकृत प्रयत्नः।।

पूजा स्थल पर बाल गोपाल श्री कृष्ण का चित्र लगावें।

 

  1. धन वर्षा मंत्र :

नवरात्रि में पूजा गृह में देवी महालक्ष्मी की मूर्ति अथवा चित्र स्थापित करके पूजन करें तत्पश्चात मंत्र पाठ करें –

पद्मासने पद्द अरु पद्दमक्षि पदम् सम्मवें।

तन्मे भजसि पद्माक्षी, येन सौख्यं लभामहे।।

अश्वदायी गोदायी धनदायी महाधने।

धन में जुषतां देवि सर्वकामांश्चा देहि में।।

 

  1. शनिदोष निवारक मंत्र :

शनि के प्रकोप से कौन बच सका है। देवता, दानव, मानव शनि की टेढ़ी दृष्टि से मुसीबतों के जाल से घिर जाते हैं – शनि की कुदृष्टि से पांडव वनवासी हुए। पुरुषोतम राम को वनवास जाना हुआ। यदि शनि ग्रह की अशुभ दशा से आप प्रभावित हैं तो नवरत्र स्थापना दिवस से नवमी तक निचे दिए मंत्र का पाठ करें –

ॐ प्रां प्रीं प्रौं शं शनये नमः।।

 

भगवती दुर्गा हवन विधि व मंत्र :

उपासकों ! नवरात्रे के अंतिम दिन पूजन व पाठ संपन्न होने के बाद “हवन” करें। “हवन” करें। हवन में आम की लकड़ी पर अग्नि प्रज्जवलित करें। गाय के घी में काले तिल, जौ, अक्षत, गुड़ [शक्कर] चन्दन का भूरा, सरहड़, गुग्गल, कपूर एवं बाजार से प्राप्त शुद्ध हवन सामग्री पैकेट की वस्तुएँ मिलाकर हवन में आहुति डालें।

 

हवन मंत्र :

ॐ प्रजापत्ये स्वाहा, इंद प्रजापतये।

ॐ इन्द्राय स्वाहा, इदम इन्द्राय इन्द्रायधारो।

ॐ भूः स्वाहा, इदम भुवः। 

ॐ  अग्नये स्वाहा, इदम अग्नये।

ॐ स्वंः स्वाहा, इदम सूर्याय।

ॐ सोमाय स्वाहा, इंद सोमाय न मम इत्याज्य भागौ।

ॐ मंगलाय नमः , इंदम मंगलाय स्वाहा।

ॐ बुधाय नमः , इंद बुधाय स्वाहा।

ॐ बृहस्पत्ये नमः स्वाहा, इदम ब्राहस्पत्ये।

ॐ शुक्राय नमः स्वाहा, इदम शुक्राय।

ॐ  शनये नमः स्वाहा, इदम शनये।

ॐ राहवे नमः स्वाह, इदम राहवे।

ॐ केतवे नमः स्वाहा, इदम केतवे।

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टि वर्धनम उर्वारुक मिव बन्धनान्मृत्यो-र्मुक्षीय मामृतात स्वाहा।

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि,धियो यो नः प्रचोदयात स्वाहा।

ॐ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते, स्वाहा।।

ॐ रोगान-शेषान पहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान संकलान भीष्ठान।

ॐ जयंती काली मंगल काली भद्र काली कृपालिनी।

ॐ मंगलम भगवान विष्णु मंगलम गरुड़ध्वजा।

मंगलम पुण्डरी काक्षं मंगलाय च तनो हरिः स्वाहा।।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे, नमः स्वाहा।।

ॐ नवदुर्गे नमः स्वाहा।

ॐ वैष्णवी नमः स्वाहा।

ॐ महालक्ष्मी नमः स्वाहा।

ॐ महासरस्वती नमः स्वाहा।

ॐ सर्वदेवता कुल देवता नमः स्वाहा।

ॐ सर्वदेवी कुलदेवी नमः स्वाहा।

ॐ रुद्राय नमः स्वाहा।                        

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