Essay on Diwali

  Essay on Diwali

दिवाली – मेरा प्रिय त्यौहार

 

दिवाली,जैसा की हम सब लोग परिचित है,एक हिन्दू पर्व है। जो पूरे भारत वर्ष में बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता रहा है। हर वर्ष इस त्यौहार के दिन भारत में कई जगह बहुत बढ़िया तरीके के कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। जिसमे प्रत्येक व्यक्ति बढ़ चढ़ के भाग लेता है। इस दिन पूरे भारतवर्ष में हर्षोलास फैला रहता है। इस त्यौहार की तैयारियां बहुत दिन पहले से शुरू हो जाती है। सभी लोग अपने घर की साफ़ सफाई करते या करवाते हैं।

और जब दिवाली का दिन आता है तो लगभग हर जगह मेले लग एते है अहा लोग जाके दिवाली का उत्सव मानते हैं। मेलों में झूले झूलते है। और घर पे बढ़िया बढ़िया पकवान बनवाते है। सब लोग खुश रहते है,सुन्दर  कपडे पहनते हैं और घर को भी सूंदर बनाते है। बच्चे इस दिन पटाखे फोड़ते है ,जो की बिलकुल अच्छी बात नहीं है। इससे वायु प्रदुषण फैलता है जो जानलेवा होता है। वैसे वायु प्रदुषण कम करने के  लिए उपाय करती है जिसमे ग्रीन क्रैकर्स  शामिल किया गया है जो बहुत सफल भी हुआ है ,दिल्ली में ज्यादा प्रदुषण के चलते उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में पटाखों पर बैन लगाया। जिससे बहुत फर्क पड़ा।

यह त्यौहार भारत के इतिहास से जुड़ा हुआ है क्योंकि इस दिन अयोध्या के नरपति या महाराज श्री राम चंद्र जी १४ वर्ष का वनवास काट के वापस अयोध्या आये थे। इससे खुश होके अयोध्यावासियों ने घी के दिए जलाये। इसलिए इस दिन भारत में  हर  व्यक्ति दीयों से अपने घर को सजाते हैं।  लोग इस दिन अपने आसपास के लोगो को मिठाई खिलते है। लेकिन कुछ लोग इस  दिन को जुआ खेल के मानते है ,शराब पीते हैं और इस दिन के दिन भी लड़ाई  झगडे करते है। ऐसे लोग इस पवित्र दिन के दिन भी घिनौनी काम करते है और अपने आप को समझदार समझते है लेकिन वो ऐसा करके कुपात्र कहलाते है और यदि ये लोग पुलिस के पकड़ में आ जाते है तो उन्हें बहुत बड़ा जुर्माना भरना पड़ता है। इससे हमें यही सीख मिलती है की हमें कुछ भी गलत काम नहीं करना चाहिए वरना   उसका अंजाम भी हमें भुगतना पड़ेगा।

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