Hindi Lokokti with sentences

  Hindi Lokokti with sentence

 

                         लोकोक्तियाँ

‘लोकाक्ति’ शब्द दो शब्दों से बना है – लोक + उक्ति अर्थात लोगों के द्वारा कही गई बात। अपने कथन की पुष्टि, दूसरों को शिक्षा देने के उद्देश्य से या व्यंग्य करने के लिए लोकोक्ति का प्रयोग किया जाता है। इनमे जीवन का विस्तृत अनुभव समाया होता हैं। इनके प्रयोग से भाषा अधिक सूंदर, स्पष्ट तथा प्रभावपूर्ण हो जाती है।

 

मुहावरे तथा लोकोक्ति में अंतर :

क. लोकोक्ति लोक में प्रचलित उक्ति होती है जबकि मुहावरा अपने रूढ अर्थ के लिए प्रसिद्ध होता है।

ख. लोकोक्ति पूर्ण वाक्य होती है जबकि मुहावरा वाक्य का एक अंश होता है।

ग. किसी बात के समर्थन, विरोध या खंडन के लिए लोकोक्ति प्रयोग में लाई जाती है जबकि मुहावरा वाक्य में चमत्कार उत्पन्न कर उसे प्रभावशाली बनता है।

घ. मुहावरों का प्रयोग वाक्यांश के रूप में होता है जबकि लोकोक्ति का प्रयोग वाक्य या कथन के अंत में स्वतंत्र वाक्य के रूप में होता है।

 

दूसरे 1. अपनी-अपनी ढपली अपना-अपना राग = सबका अलग मत, अपने मन की करना

इस घर में तो सब अपनी-अपनी ढपली अपना अपना राग अलापते हैं

 

  1. अपना हाथ जगन्नाथ = परिश्रम में शक्ति होती है

भीख मांगने से अच्छा है की स्वयं मेहनत करके कमाई करो, अपना हाथ जगन्नाथ होता है

 

  1. अंत भले का भला = अच्छे का परिणाम अच्छ होता है

चमन बचपन में अपने वृद्ध माता – पिता की बहुत सेवा करता था। अब वह स्वयं वृद्ध हो गया है और उसके बच्चे उसके ही पद – चिह्नों पर चलकर उसकी सेवा करते है अंत भले का भला

 

  1. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता = अकेला आदमी बड़े काम नहीं कर सकता

सैनिक शिविर पर आतंकवादी हमले में केवल एक जवान ने सामने आकर मुकाबला किया, बाकि सब इधर-उधर छिप गए और वह जवान घायल हो गया।  इसलिए किसी ने  कहा है की अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।

 

  1. अँधा क्या चाहे दो आंखे = बिना प्रयास के मनचाही वास्तु का मिल जाना

राम को दफ्तर जाने में बहुत कठिनाई होती थी।  उसकी इच्छा थी की उसके पास कार हो।  अकस्मात् उसकी लाटरी में कार निकल आई।  उसके लिए तो अँधा क्या चाहे दो आंखे कहावत सिद्ध हो गयी।

 

  1. आम के आम गुठलियों के दाम = दोहरा लाभ

गगन पड़ने में होशियार है, वह अपनी कक्षा के बच्चो को ट्युशन पड़ा कर अपना जेब खर्च भी चलाता है।  इस तरह वह अपनी पढाई की पुनरावृत्ति भी कर लेता है।  यह हुई न बात आम के आम गुठलियों के दाम।

 

  1. आ बैल मुहे मार = खुद ही अपने लिए मुसीबत खड़ी करना

विशाल अपने परिवार का तो भरण -पोषण अच्छी तरह कर नहीं सकता, परन्तु घर में और रिश्तेदारो को बुलाकर उसने ‘आ बैल मुझे मार वाली ‘ कहावत चरितार्थ कर दी।

 

  1. आए थे हरिभजन को ओटन लगे कपास = आवश्यक कार्य छोड़कर अनावश्यक कार्य करने लग जाना

विद्यालय में पढ़ने हेतु गए परन्तु खेलकूद में व्यर्थ समय गवांया। आय थे हरिजन को ओटन लगे कपास।

 

  1. आधी छोड़ पूरी को धांवै, आधी मिले न पूरी पावै = अधिक लालची व्यक्ति को कुछ नहीं मिलता

पांच वर्ष पूर्व रिलायंस के एक शेयर का भाव 600 रूपए था।  रौनक उस समय तो अधिक कीमत के लिए अड़ा रहा।  परन्तु आज उसके 300 रूपए मिल रहे हैं।  सच ही कहा है – आधी छोड़ सारी को धावै, आधी मिली न पूरी पावै।

 

10.अधजल गगरी छलकत जाये = थोड़े ज्ञान वाला बहुत बढ़-चढ़ कर बोलता है

आज चीनू ने अपनी कुश्तियाँ जीतने के बारे में ढिंढोरा पिट रहा है जबकि वह हमेशा हारता ही रहा है, परंतु इसमें उसकी क्या गलती।  वह तो अधजल गगरी छलकत जाये वाली बात हुई।

 

  1. ओछे की प्रीति, बालू की भीत = दुष्ट व्यक्ति का प्रेम अस्थिर होता है

राहुल को जब शादी करवानी थी तो रोज़ चक्कर लगाता था, बी उसकी शादी हो गई तो मित्र से नाता ही तोड़ लिया।  सच ही कहा है – ओछे की प्रीति, बालू की भीत।

 

  1. इस हाथ दे उस हाथ ले = लेने का देना

तुम मेरे बच्चो को अंग्रेजी पढ़ा देना और में तुम्हारे बच्चों को हिंदी।  इसे ही कहते है इस हाथ दे उस हाथ ले।

 

  1. एक पंथ दो काज़ = एक कार्य से दो लाभ

गरीबों को खाना खिलाने से एक तो उनक पेट भरता है, दूसरा इससे पुण्य भी मिलता है।  हुई न एक पंथ दो काज वाली बात।

 

  1. 14. ईश्वर की माया कही धुप कही छाया = भाग्य की विचित्रता

चमन और रमन दो भाई है।  चमन तो बहुत साहूकार है लेकिन रमन बिल्कुल कंगला।  ठीक ही कहा है, ईश्वर की माया, कही धुप कही छाया।

 

  1. कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली = दो व्यक्तियों की स्तिथि में बहुत अंतर होना

पुलिस कमिश्नर और सिपाही के पुत्रों में मित्रता अवश्य है, परंतु दोनों का क्या मुकाबला। कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली।

 

  1. चौबे गए छब्बे बनने, दुबे ही रह गए = लाभ के स्थान पर हानि होना

वशिष्ट ने कंप्यूटर सेंटर खोला था कुछ कमाने के लिए परंतु बिजली के शार्ट सर्किट के कारण दुकान में आग लग गयी।  यह तो वही हुआ चौबे गए छब्बे बनने, दूबे ही रह गए।

 

  1. गुरु गुड़ ही रहे, चेले शक्कर बन गए = चेला गुरु से भी आगे बढ़ गया

मास्टर जी जिस विद्यालय में पढ़ा रहे है उनका शिष्य उसी विद्यालय की कमेटी का चेयरमैन बन गया है।  देखो न गुरु गुड़ ही रहे, चेले शक्कर हो गए।

 

  1. 18. काठ की हाँडी बार-बार नहीं चढ़ती = चालाकी से एक बार काम निकलता है, बार-बार नहीं

एक बार तो तुमने उधार लेकर चुकाया नहीं और अब फिर मांग रहे हो।  भाई, काठ की हाँडी बार-बार नहीं चढ़ती।

 

  1. 19. चोर के पैर नहीं होते = पाप करने वाला डरता नहीं है

क़त्ल के बारे में जब पुलिस ने लुइस से पूछताछ की तो उसका रंग उड़ गया।  किसी ने सच ही कहा है की चोर के पैर नहीं होते।

 

  1. कौआ चला हंस की चल अपनी भी भूल गया = दूसरे की नक़ल करने के प्रयास में अपनी विशेषता भी भूल गया

पीतांबर पाश्चात्य संगीत सिखने के प्रयास में भारतीय संगीत भी भूल गया।  तभी तो लोग कहते है – कौआ चला हंस की चल अपनी भी भूल गया।

 

  1. 21. चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए = बहुत कंजूस होना

साहूकार गरीबो के लिए क्या दान देगा ? इसका तो यह हाल है की चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए।

 

  1. का बरखा जब कृषि सुखानी = समय बीतने पर सहायता करना व्यर्थ है

सविता का बेटा पैसो के अभाव के कारण बिना दवाई के मर गया और ऊषा अब पैसे भिजवा रही है, ‘का बर्षा जब कृषि सुखानी’

 

  1. खोदा पहाड़ निकली चुहिया = परिश्रर अधिक, फल कम

मज़दूर दिन भर मेहनत करता है और शाम को केवल 50 रूपए मिलते है। यह तो खोदा पहाड़ निकली चुहिया वाली बात हो गई।

 

  1. कबहुँ निरामिष होये न कागा = दुष्ट अपनी दुष्टता कभी नहीं छोड़ता

सरकारी दफ्तरों में जगह-जगह पोस्टर लगे होते है की रिश्वत लेना और देना क़ानूनी जुर्म है।  परंतु कर्मचारी बिना लेंन-देन के काम ही नहीं करते।  इसलिए में कहता हूँ – कबहुँ निरामिष होये न कागा।

 

  1. धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का = अस्थिरता के कारण कही का न रहना

उसने ऊँचा पद पाने के लालच में छोटी नौकरी छोड़ दी और उसे ऊँचा पद भी नहीं मिला। अब तो धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का।

 

  1. जाको राखे सईयाँ मार सके न कोय = जिसका रक्षक भगवान है उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता हैं।

श्रद्धा का 6 महीने का बच्चा छत से गिर पड़ा परंतु उसे जरा-सी-चोट भी नहीं लगी।  सच कहते है – जाको राखे सईयाँ मार सके न कोय।

 

  1. 27. सहज पके सो मीठा = धीरे-धीरे किया गया कार्य अच्छा होता है

शादी की तैयारीयाँ अभी शुरू कर दो वरना  शादी के दिन बड़ी कठिनाई होगी।  जानते नहीं सहज पके सो मीठा।

 

  1. जल में रहकर मगर से बैर = समाज में रहकर शक्तिशाली लोगों से बैर करना हानिकारक होता है

मजदूर को मिल के मैनेजर से झगड़ा नहीं करना चाहिए।  इसीलिए तो कहते है की जल में रहकर मगर से बैर नहीं करना चाहिए।

 

  1. 29. पर उपदेश कुशल बहुतेरे = दुसरो को उपदेश देना परंतु खुद अमल न करना

पुलिस कमिशनर रिश्वत पर भाषण दे रहा है और खुद रिश्वत देकर ही पुलिस कमिश्नर बना है।  तभी तो कहते है, पर उपदेश कुशल बहुतेरे

 

  1. जो गरजते है वे बरसते नहीं = अधिक बोलने वाले व्यक्ति काम कम करते है

रोहित ने कहा था की में अनुभाग अधिकारी की परीक्षा में प्रथम स्थान पाउँगा।  परंतु परिणाम आने पर वह पास भी नहीं हुआ।  इसलिए कहते है जो गरजते है वे बरसते नहीं।

 

  1. दादा बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपैया = धन ही सब कुछ है

नौकरी पाने के लिए बहुत बड़ी सिफारिश लगवाई परंतु नौकरी उसे मिली जिसने रिश्वत दी।  इसलिए कहते है की आज कल तो दादा बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपया।

 

  1. तेते पांव पसारिए जेती लँबी सौर = सामर्थ्य के अनुसार खर्च करना

अपनी बेटी की शादी में अधिक खर्च मत करना।  याद रखना तेते पाँव पसारिए जेती लँबी सौर।

 

  1. थोथा चना बाजे घना = ओछा व्यक्ति सद दिखावा करता है

कग्नूलकर दिन-रात पढ़ाई  करने की बात करती है, परंतु है इसके विपरीत।  तभी तो कहते है थोथा चना बाजे घना।

 

  1. डूबते को तिनके का सहारा = विपत्ति में ज़रा-सी मदद भी किसी को उभार सकती है

शादी में अधिक खर्च होने का अनुमान होने के कारण चमन बहुत परेशान है।  अगर तुमने उसे कुछ पैसे दे दिए तो उसके सब काम हो जायेंगे।  डूबता को तिनके का सहारा ही बहुत होता है।

  1. 35. हाथ कंगन को अरसी क्या = प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं

पुलिस ने चोर को रँगे हाथो पकड़ा और चोरी का माल भी बरामद कर लिया, परंतु चोर कहता है मेने चोरी नहीं की। अब चोर की बात कौन मानेगा। हाथ कंगन को आरसी क्या।

 

  1. नेकी कर कुएँ में डाल = उपकार करके उसे जाताना नहीं चाहिए।

गरीब विद्यार्थी की फ़ीस चुकाने के बाद भी वह कुछ भी नहीं कहता। उसका सिद्धांत है, नेकी कर कुएँ में डाल।

 

  1. बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद = मुर्ख व्यक्ति गुण का आदर करना नहीं जनता

गगन को धार्मिक पुस्तक देने से क्या लाभ।  वह ले तो गया है परंतु पढ़ेगा नहीं। बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद।

 

  1. होनहार बिरवान के होते चिकने पात = होनहार व्यक्तियों की प्रतिभा बचपन में ही दिखाई देने लगती हैं

इंदिरा गाँधी ने अपने पिता जवाहर लाल नेहरू के साथ रहकर 10 वर्ष की आयु में ही राजनीती पर पुस्तक लिख दी थी।  सच है – होनहार बिरवान के होते चिकने पात।

 

  1. रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई = सब समाप्त हो गया किन्तु शेखी अब भी वही की वही

अध्यापक से मार खाने के बाद भी चमन अकड़ कर बात कर रहा है।  रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई।

 

  1. साँप भी मरे और लाठी भी न टूटे = बिना हानि उठाये काम बन जाना

तुम अब अपनी लड़की की शादी कर दो और उसके प्रेमी को गाँव से बाहर निकाल दो।  इससे साँप भी मर जायेगा और लाठी भी नहीं टूटेगी।

 

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