पूर्णिमा व्रत पूजन विधि , महत्व , नियम व उद्यापन विधि

poornima vrat poojan vidhi , mahatv , niyam va udyaapan vidhi 26 aprail 2021

पूर्णिमा व्रत पूजन विधि , महत्व , नियम व उद्यापन विधि 26 अप्रैल 2021

 

पूर्णिमा व्रत पूजन के बारे में बताते है व्रत के लाभ  व्रत के महत्त्व पूर्णिमा का  व्रत कैसे करें व्रत वाले दिन क्या खाये और क्या न खाये इसके सम्पूर्ण व सही जानकारी हम आपको बताते है इसे आप पूरा पढ़े इसमें  बताया जायगा हिन्दू कैलेंडर के अनुसार पूरा चंद्रमा दिखाई देने वाला दिन पूर्णिमा कहलाता है पूर्णिमा अर्थार्त पंचांग कि एक खास स्तिथि होती है  में  पंचांग में

तिथियों का निर्धारण चंद्रमा  की चढ़ती उतरती कलाओ पर किया जाता है जिस तिथि को चंद्रमा अपने खुद के आकर में दिखाई देता है व तिथि पूर्णिमा कहलाती है य हम जिस तिथि को चंद्रमा दिखाई नहीं देता  व तिथि अमावस्या कहलाती है।

पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी पुरे आकर में होता है व देखने में बहुत ही सुंदर दिखता है  पूर्णिमा तिथि का हिन्दू धर्म में बहुत ही खास  महत्त्व है कहा जाता है की पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी साक्षात इस धरती पर भमण के लिए आती है साथ ही चंद्रमा का भगवान शिव से ही भी घनिस्ट संबंध है क्योंकि भगवान शिव ने चंद्रमा   को अपनी जटा में धारण कर रखा है इस दिन चंद्रमा की पूजा के साथ शिवजी का पूजन करने से अन्नत फल की प्राप्ति होती है। आपकी मानसिक चिंताए भी दूर होती है पूर्णिमा दिन भगवान विष्णु जी का भी पिरिय दिन है इस दिन  व्रत पूजन करने से भगवान विष्णु जी प्रसन होते है पूर्णिमा व्रत करने से भागय उदय होता हे व्यक्ति पूर्णिमा का व्रत करके सभी सुको को प्राप्त कर सकते है चंद्रमा माँ का सूचक होता है मन का कारक होता है चंद्रमा कर्क राशि का भी

सुआमी होता है. चंद्रमा के प्रभाव से व्यक्ति की सोच व स्मरण करने की शक्ति अत्यदिक बढ़ भी सकती है कम भी हो सकती है।  व्यक्ति के मन में आत्म हत्या करने के विचार भी बार-बार आते रहते है मानसिक तनाव मन में घबराहट मन में तरह- तरह की संका और सर्दी की परेशानी बानी रहती है चंद्रमा जैसे -जैसे कृष्ण पक्ष में छोटा व शुकल पक्ष में पूर्ण होता है वैसे – वैसे मनुष्य के मन पर भी चंद्रमा का प्रभाव पड़ता है। पूर्णिमा के दिन कुछ उपायों को किया जा सकता है इससे पति पत्नी में प्रेम बढ़ता है जिसे कुछ  पति पत्नी में बिलकुल ही प्रेम नहीं होता एक दूसरे से हमेशा लड़ते झगड़ते रहते है वे लोग अलग होने तक की सोच लेते है

अगर पति पत्नी दोनों में से कोई भी एक प्रत्येक पूर्णिमा को  चंद्रमा  को कच्चे दूध का अरग दे य दोनों मिलकर साथ में चंद्रमा  को  अरग दे तो उनका दांपत्ये जीवन फिर से प्रेम भरा रहेगा दांपत्ये जीवन में मधुरता आ जायगी चंद्रमा से अगर शुभ गृह 6  7 और 8 राशि में हो तो यह बहुत ही शुभ स्तिथि है  शुभ गृह हमें शुक्र बुध और ब्रस्पति य योग मनुष्य जीवन में सुखी ऐश्वर्य वस्तुओं में भरपूरता शत्रुओ पर भी विजय लम्बी आयु कई प्रकार के सुख प्राप्त कराती है। जब चंद्रमा में कोई शुभ गृह जैसे शुक्र बुध और ब्रस्पति दसवें भाव में हो तो व्यक्ति दीर्घ आयु धनमान और परिवार सहित हर प्रकार के सुखी होता है जिस भी व्यक्ति को जीवन में धन सम्बंधित परेशानी हमेशा बानी रहती है उन्हें पूर्णिमा के दिन चंद्र उदय के समय चन्द्रमा को कच्चे दूध में चीनी और चावल मिलकर अरग देना चाहिए इस प्रकार से हर पूर्णिमा को दूध का अरग देने से आर्थिक समस्या समाप्त हो जाती है

हर पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी माँ के मंदिर में जाकर माता को इत्र और सुंगधित अगरबत्ती अर्पण कीजिए इससे धन सुख समृद्धि और आयुश्वारी की देवी माँ लक्ष्मी आपके घर में स्थाई रूप से निवास करेंगी पूर्णिमा की रात 15 से 20 मिनट तक चन्द्रमा को आप लगातार देखे इससे नेत्रों की रोशनी तेज होती है पूर्णिमा के दिन  चन्द्रमा की चांदनी हमारे शरीर के लिए बहुत लाभदायक है। अगर पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा का प्रकार गर्ववती महिला की नाभि पर पड़े तो गर्व शुस्त होता है गर्ववती महिला को तो जरूर कुछ देर चन्द्रमा की चांदनी में रहना चाहिए इस प्रकार से  चन्द्रमा पूर्णिमा का दिन खास होता है। तो हम आपको  पूर्णिमा व्रत पूजा विधि बताते है कि  पूर्णिमा का व्रत कैसे करे की हमे  पूर्णिमा व्रत का सम्पूर्ण शुभ फल प्राप्त हो हिन्दू पंचांग के अनुसार  पूर्णिमा शुक्ल पक्ष की अंतिम 15 वीं तिथि पर होती है इस दिन चन्द्रमा आकाश में पूर्ण रूप से दिखाई देता है चन्द्रमा की पूजा करने के लिए  पूर्णिमा अलग-अलग तरह के पुरे साल भर आती है

पूर्णिमा की पूजा की विधि बहुत ही सरल है इस पूजा को करने से आपको सभी शुको की प्राप्ति होने लगती है अगर आप  पूर्णिमा का व्रत शुरू करना चाहते है। तो आप  पूर्णिमा का मार्ग शीश यानि अगहन के महीने की  पूर्णिमा  व्रत शुरू करे य फिर आप चाहे तो साल की किसी भी  पूर्णिमा से आप य व्रत शुरू कर सकते है  पूर्णिमा के दिन पोडानी की धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन तीर्थ स्थान पर स्नान करना शुभ होता है लेकिन ऐसा सोभाव न हो तो आप घर के नहाने के पानी में गंगा जल मिलकर भी स्नान कर सकते है। यह भी शुभ होता है स्नान के बाद शुआछव वस्त्र धारण कीजिए सुबह घर की रोज की पूजा कीजिए साथ ही पूर्णिमा व्रत का संकल्प भी ले पूर्णिमा के दिन आप सुबह और श्याम को भगवानक्योंकि की पूजा कीजिए शिवलिंग पर शहद कच्चा दूध बेलपत्र जल चढ़ाकर उनका पूजन करें  क्योंकि चन्द्रमा का  भगवान शिव से ध्वनिस्ट संबंध रहें  क्योंकि शिवजी ने चन्द्रमा को अपनी जटाओ में धारण कर रखा है इस दिन चन्द्रमा की पूजा के साथ शिव का भी पूजन जरुरी है

इससे अनंत शुभ फल की प्राप्ति होती है। चन्द्रमा एक स्त्री ग्रह कहा गया है विधिक शास्त्र में इसलिए यह माँ पार्वती जी का भी प्रतिक माना गया है  इससे भगवान शिव के साथ हमें इस दिन माता पार्वती जी का भी पूजन करना चाहिए पूर्णिमा व्रत वाले दिन आप पुरे दिन भोजन न खाए यदि आपका स्वस्थ टिक नहीं है आप कमजोर है आप फलाहार कर सकते है आप इस दिन मीठा भोजन कर सकते है लेकिन आप पूर्णिमा के दिननमक न खाए संध्या के चन्द्रमा के निकलने पर हमें पूर्णिमा की पूजा करनी चाहिए पूजा आप घर के छत य आंगन में भी कर सकते है पूजा स्थान को स्वच करके चौक बना ले आटे से और फिर कलश की स्थापना के साथ ही एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछा ले उसपर गौरी गणेश जी को स्थापित कर लीजिए आप उस चौकी पर शिव परिवार की फोटो भी रख सकते है।

उनकी भी पूजा यदि आप कीजिए य बहुत ही शुभ होता है उस फोटो में सभी देवी व देवताओं की पूजा हो जाती है अगर आप नियमित रूप से हमेशा पूर्णिमा का व्रत करते है तो आप चाँदी का चाँद य चन्द्रमा बनवाकर भी उसकी पूजा कर सकते है पूजा करते समय पहले आजमन करें उसके बाद पहले गौरी ब गणेश जी की पूजा कीजिए उसके बाद भगवान शिव जी पूजा करे सभी देव देवताओ को तिलक करें पुष्प अर्पित करें फूलों की माला पहनाए घी का दीपक भगवान के सामने जलाकर रखें धुप दीप जलाए मिठाई का भोग लगाए जब आप य पूजन करते है  तब तक भगवान चंद्रदेव निकल आएंगे तो चन्द्रमा को अर्ग दे एक लोटे में शुद्ध जल थोड़ा कच्चा दूध मिलकर अर्ग दे चन्द्रमा की भी पूजा उन्हें धुप दीप दिखाए पुष्प अर्पित करें इसके पश्याताप आप पूर्णिमा व्रत की कथा पढ़े कथा सुने कथा सुनते समय हाथ में चावल लेकर कथा सुने कथा के बाद हवन भी करें य हवन  करना संभव न हो तो इस प्रकार से भी पूजा व कथा के बाद भगवान गणेश जी का और भगवान शिव माता पार्वती जी की आरती कीजिए व्रत को पूरा कीजिए पूर्णिमा का व्रत के पहले पूर्णिमा के एक दिन एक दीपक और इसी तरह से 32 पूर्णिमा को 32 आटे के दीपक जलाकर पूजन करना चाहिए य संभव न हो तो आप एक ही घी का दीपक जलाकर भी पूजन शुरू कर सकते है।

इस प्रकार से पूजा के बाद भगवान से आप पूजा में हुई भूल की समां याचना भी कीजिए 32 पूर्णिमा का व्रत आप करें यह शुभ होता है। पूर्णिमा व्रत में आप उद्यापन किसी पंडित को बुलवाकर उद्यापन करवाए तो बहुत ही अच्छा रहेगा क्योंकि पंडित विधि पूर्वक विधान से मंत्रो के उच्चारण के साथ उद्यापन विधि पूर्ण करवाएंगे उद्यापन वाले दिन आप इसी प्रकार से पूर्णिमा की पूजा करे श्याम में ब्रमांडो को भोजन करवाए उन्हें दान दक्साना देकर उन्हें विदा करें इसके बाद आप भोजन खाईए इस प्रकार से आप पूर्णिमा का व्रत पूर्ण कीजिए पूर्णिमा के दिन व्रत वाले दिन पूजा के बाद आप ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप जरूर करें इसके बाद ही भोजन ग्रहण कीजिए व्रत वाले दिन आप सफ़ेद रंग क्र वस्त्र पहने य अति शुभ रहता है पूर्णिमा के दिन यत्व व मांगलिक कार्य विवाह आदि करना अति शुभ माना जाता है पूर्णिमा के शिव पूजन व विष्णु जी का पूजन करना और धार्मिक कार्यो को करना अति शुभ होता है। इसी प्रकार स आप विधि विधान पूर्वक आप पूर्णिमा का व्रत करे आपको सभी सुखो की प्राप्ति जल्दी  होगी यह व्रत सभी को करना चाहिए यह बहुत ही अच्छा व्रत है इससे सभी सुखो की प्राप्ति व्यक्ति को होती है।

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