Essay on Pollution in Hindi

      Essay on Pollution in Hindi

प्रदूषण की समस्या

विज्ञानं अब बहुत आगे बढ़ चूका है, जो दिन प्रतिदिन हमारे कार्य को आसान बनाने के लिए खोज कर रहा है, परन्तु यही खोज हमारी पृथ्वी और वायुमंडल को प्रदूषित करने में लगा हुआ है। 100 सालो में तोह विज्ञानं ने आविष्कारों के सैलाब ला दिए जो हमारे दिनचर्या का एक अभिन्न अंग बन गए है। परन्तु इन आविष्कारों से निकलने वाला धुआँ और आवाज़ पर्यावरण को दिन ब दिन ख़राब कर रहे हैं जो मानव जाती के लिए विनाश का कारण बन चुकी है तथा प्रदूषण से हर वर्ष लाखों लोगों की दुःखद तथा बेमौत मृत्यु भी हो जाती है। प्रदुषण की वजह से पृथ्वी का संतुलन भी बिगड़ चुका है जिस  कारण  बे मौसम वर्षा आम बात हो चुकि  है जिससे हर साल बहुत सारी फसलें तबाह हो जाती हैं और बाढ़ भी आ जाती है। प्रदूषण की वजह से ग्लोबल वार्मिंग भी बढ़ गया है, जो सुनाम, भूकंप, तूफ़ान, बवंडर, जंगल में आग, तापमान बढ़ना आदि, आम बात हो गई है।प्रदुषण ने न जाने कितने बेजुबान जानवरो तथा पक्षिओं की जान ले ली है या विलुप्त हो गए है और कई सरे विलुप्त होने के कगार पर है। मानवजाती ने प्रदुषण बहुत हद तक बढ़ा दिया और अब वो हमारे समुन्द्र को भी गन्दा कर दिया है, और जिस कारण न जाने अंगिनत समुद्रीय जिव तड़प-तड़प के मर जाते है। मानव यहाँ भी नहीं रुका और अब वह पृथ्वी से अलग अंतरिक्ष में भी कूड़ा फेंकना शुरु कर दिया है। अगर मानव अभी भी नहीं रुका तोह वो जल्द ही सर्वनाश की कगार पर हो जाएगा और ये पृथ्वी ही ख़तम हो जाएगी। प्रदुषण के कारण कैंसर, हैजा, डेंगू, चिकनगुनिआ आदि बीमारियां हो सकती हैं। प्रदुषण जल्द ही एक महामरी का रूप भी ले सकता है जो समस्त मानवजाती का ख़ात्माभि कर सकता हैं। प्रदुषण का एक सबसे बड़ा करक है प्लास्टिक जिसका उपयोग आज के समय में हर एक वास्तु में किया जा अहा है जो की मानवजाति के लिए तथा पर्यावरण के लिए एक अभिशाप है जो धीरे-धीरे धरती और इंसानो को खोखला कर रही है क्युंकि प्लास्टिक को गलने में या सड़ने में सेकड़ो साल का समय लगता हैं और साथ ही साथ यह एक जहरीला प्रदात भी है। प्रदुषण का एक भयानक और पृथ्वी को समाप्त करने के कगार पर लाने वाला कारक परमाणु बम है जो कुछ ही पालो में इस बह्रामंड में से पृथ्वी का नमो-निशान मिटने का दम रकते है। परमाणु बम फटने से उस जगह का वातावर्ण पूरी तरह से दूषित हो जाता है जो किसी भी मानव तथा वस्तुओ के लिए मौत का कारण बन जाता और हर कुछ भाप बन कर उड़ जाता हैं। वहा विस्पोठ होने के कई दिनों बाद तक भी मानव का जाना-जान से हाथ धोना पक्का है। फैक्ट्री से निकलने वाला धुआँ और रासायनिक प्रद्धत मानव को प्रतिदिन खोखला कर रहा है। जिस कारन मानव के पास बहुत काम मात्रा में पीनें का साफ पानी तथा साफ हवा बची हैं, जो बहुत जल्द ख़तम हो जाएंगे और जिस कारण अकाल भी पद जाएगा और पानी के साथ-साथ खाद्य प्रद्धत भी ख़त्म हो जाएगा और जल्द ही देशो के बीच जमीनों के लिए नहीं बल्कि पीने के लायक साफ पानी तथा खाद्य प्रद्धत के लिए जंग होगी। पर अब मानवजाति को सुधारना होगा वर्ना बहुत देर हो जाएगी और मानव जाती समाप्त हो जाएगी।

 

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